Tuesday, May 12, 2026
English edition

India

पश्चिम बंगाल चुनाव में बड़े उलटफेर, नक्सलबाड़ी में BJP की रिकॉर्ड जीत

May 10, 2026 Source: Bharat Pulse Media

पश्चिम बंगाल चुनाव में बड़े उलटफेर, नक्सलबाड़ी में BJP की रिकॉर्ड जीत

Share this article

भारत के चुनाव आयोग ने ECINET प्लेटफॉर्म के माध्यम से 2026 विधानसभा चुनावों के विस्तृत सांख्यिकीय इंडेक्स कार्ड और रिपोर्ट जारी की हैं। यह रिपोर्ट नतीजे घोषित होने के 72 घंटों के भीतर जारी की गई, जिसे आयोग ने अब तक का सबसे तेज़ डेटा प्रकाशन बताया है। इन रिपोर्टों में देशभर की 830 विधानसभा सीटों के चुनावी आंकड़े शामिल हैं, हालांकि पश्चिम बंगाल की फाल्टा सीट को इसमें शामिल नहीं किया गया है, क्योंकि वहां 21 मई को पुनर्मतदान होना है। रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल में मतदान प्रतिशत, महिला-पुरुष भागीदारी, जीत के अंतर, मतदाता सूची में बदलाव और चुनावी रुझानों में क्षेत्रों के अनुसार काफी अंतर देखने को मिला। उत्तरी बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मजबूत प्रदर्शन किया और कई सीटों पर बड़े अंतर से जीत दर्ज की। विशेष रूप से मातिगारा-नक्सलबाड़ी सीट पर सबसे बड़ी जीत (1,04,265 वोटों के अंतर से) BJP के खाते में गई। इसके अलावा डाबग्राम-फूलबाड़ी और इंग्लिश बाजार सीटों पर भी बड़े अंतर से जीत दर्ज की गई। वहीं, तृणमूल कांग्रेस (AITC) ने दक्षिण 24 परगना और कोलकाता से जुड़े कुछ क्षेत्रों में मजबूत पकड़ बनाए रखी। कैनिंग पूर्व और मेटियाब्रुज जैसी सीटों पर AITC ने बड़े अंतर से जीत हासिल की। कम अंतर वाली सीटों की बात करें तो कई क्षेत्रों में मुकाबला बेहद कड़ा रहा, जहां BJP ने कुछ सीटें केवल कुछ सौ वोटों के अंतर से जीतीं, जैसे राजारहाट न्यू टाउन (316 वोटों का अंतर) और सतगाछिया (401 वोटों का अंतर)। मतदान प्रतिशत के मामले में भांगर क्षेत्र सबसे आगे रहा, जहां 98.07% मतदान दर्ज किया गया। इसके बाद कैनिंग पुरबा और शीतलकुची जैसे क्षेत्रों का स्थान रहा। दूसरी ओर, दार्जिलिंग, कालिम्पोंग और कर्सियांग जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में मतदान अपेक्षाकृत कम रहा, हालांकि इन सभी सीटों पर भी मतदान प्रतिशत 80% से ऊपर रहा। महिला मतदाता भागीदारी में रघुनाथगंज सबसे आगे रहा, जबकि भांगर में पुरुष मतदान प्रतिशत सबसे अधिक दर्ज किया गया। वहीं कुछ पहाड़ी क्षेत्रों में महिला भागीदारी अपेक्षाकृत कम रही। SIR (विशेष गहन संशोधन) डेटा से यह भी पता चला कि मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे जिलों में मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए गए, जबकि बाद में कई योग्य मतदाताओं को फिर से जोड़ा भी गया। सुजापुर जैसे क्षेत्रों में नाम हटाने और जोड़ने दोनों ही मामलों में सबसे अधिक आंकड़े दर्ज हुए। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि ये सभी आंकड़े वैधानिक फॉर्म पर आधारित अंतिम डेटा हैं और इनका उद्देश्य चुनावी पारदर्शिता बढ़ाना तथा शोधकर्ताओं और आम जनता के लिए डेटा को अधिक सुलभ बनाना है।