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NHAI इंजीनियर पर कीचड़ फेंकने केस में नितेश राणे को राहत, हाईकोर्ट ने सजा रोकी

May 5, 2026 Source: Bharat Pulse Media

NHAI इंजीनियर पर कीचड़ फेंकने केस में नितेश राणे को राहत, हाईकोर्ट ने सजा रोकी

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महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे को 2019 में NHAI (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) के एक इंजीनियर पर कथित रूप से कीचड़ फेंकने के मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। बॉम्बे हाईकोर्ट की कोल्हापुर बेंच ने हाल ही में निचली अदालत द्वारा सुनाई गई एक महीने की सजा के अमल पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसके बाद उन्हें फिलहाल जेल नहीं जाना होगा। यह मामला 4 जुलाई 2019 का है, जब कणकवली क्षेत्र में मुंबई-गोवा हाईवे की खराब हालत को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही थी। उस समय नितेश राणे, जो उस वक्त विधायक थे, सड़क की स्थिति का जायजा लेने मौके पर पहुंचे थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, सड़क पर गड्ढों और कीचड़ की स्थिति को लेकर लोगों में असंतोष था। इसी दौरान भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के इंजीनियर प्रकाश शेडेकर को मौके पर बुलाया गया। आरोप है कि इसी बातचीत के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई और नितेश राणे तथा उनके समर्थकों द्वारा इंजीनियर के साथ दुर्व्यवहार किया गया, जिसमें उस पर कीचड़ फेंकने की घटना भी शामिल बताई गई। यह मामला बाद में अदालत तक पहुंचा और वर्षों तक इसकी सुनवाई चलती रही। हाल ही में 27 अप्रैल 2026 को सिंधुदुर्ग की स्थानीय अदालत ने नितेश राणे को इस मामले में दोषी ठहराते हुए एक महीने के साधारण कारावास और एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। इस फैसले के बाद उन्हें जेल भेजे जाने की संभावना बनी हुई थी। हालांकि, इस फैसले के खिलाफ नितेश राणे ने बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील दायर की। कोल्हापुर बेंच ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए निचली अदालत के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। इस रोक के बाद सजा का तत्काल प्रभाव स्थगित हो गया है, जिससे उन्हें फिलहाल राहत मिल गई है। इस पूरे मामले में यह भी चर्चा रही कि क्या सजा के चलते उनके राजनीतिक करियर पर कोई असर पड़ेगा। लेकिन कानूनी प्रावधानों के अनुसार, यदि किसी जनप्रतिनिधि को दो वर्ष या उससे अधिक की सजा नहीं होती, तो उनकी सदस्यता पर प्रभाव नहीं पड़ता। चूंकि इस मामले में सजा केवल एक महीने की थी और उस पर भी रोक लग चुकी है, इसलिए फिलहाल उनके पद पर कोई खतरा नहीं है। पुलिस ने पहले इस मामले में उन्हें गिरफ्तार भी किया था, लेकिन बाद में वे जमानत पर रिहा हो गए थे। अब यह मामला उच्च न्यायालय में आगे की सुनवाई के लिए लंबित है, जहां राणे पक्ष की ओर से फैसले को चुनौती दी जाएगी।