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मुंबई सट्टा बाजार की भविष्यवाणी: 5 राज्यों के नतीजों से पहले बड़ा दावा

May 3, 2026

मुंबई सट्टा बाजार की भविष्यवाणी: 5 राज्यों के नतीजों से पहले बड़ा दावा

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मुंबई सट्टा बाजार ने पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम को लेकर मतदान से लगभग 18 घंटे पहले अपनी ताजा भविष्यवाणी जारी की है, जिसने राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है। यह अनुमान पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के संभावित चुनावी नतीजों को लेकर है, जहां 4 मई को मतगणना होनी है। चुनाव आयोग के अनुसार, सुबह 8 बजे से वोटों की गिनती शुरू होगी, जिसमें पहले पोस्टल बैलेट और फिर ईवीएम की गिनती की जाएगी। सुबह 9 बजे से शुरुआती रुझान सामने आने लगेंगे। सट्टा बाजार के अनुमान के मुताबिक असम में बीजेपी एक बार फिर मजबूत वापसी करती दिख रही है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में पार्टी 85 से 92 सीटें जीत सकती है, जबकि कांग्रेस को 34 से 38 सीटों तक सीमित बताया गया है। यह संकेत लगातार तीसरी बार बीजेपी सरकार बनने की ओर इशारा करता है। पुडुचेरी में बीजेपी नेतृत्व वाले एनडीए और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला बताया गया है, लेकिन मामूली बढ़त के साथ एनडीए को 15 से 18 सीटें और कांग्रेस को 14 से 17 सीटें मिलने का अनुमान है, जिससे सत्ता एनडीए के पक्ष में जा सकती है। तमिलनाडु में एमके स्टालिन की पार्टी डीएमके की मजबूत वापसी का अनुमान लगाया गया है। कुल 234 सीटों में से डीएमके को 145 से 155 सीटें मिल सकती हैं, जबकि एआईएडीएमके 45 से 65 सीटों तक सिमट सकती है। अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके को 7 से 9 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। केरल में कांग्रेस के लिए सकारात्मक परिणाम का अनुमान है। 140 सीटों वाले राज्य में कांग्रेस 78 से 85 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी कर सकती है, जबकि मौजूदा एलडीएफ सरकार 56 से 66 सीटों तक सिमट सकती है। बीजेपी को यहां भी सीमित सफलता मिलती दिख रही है। सबसे चर्चित राज्य पश्चिम बंगाल को लेकर सट्टा बाजार का दावा चौंकाने वाला है। यहां बीजेपी को पहली बार पूर्ण बहुमत मिलने का अनुमान लगाया गया है। 294 सीटों में से बीजेपी को 175 से 185 सीटें और टीएमसी को 127 से 132 सीटें मिलने की संभावना बताई गई है। यह अनुमान ममता बनर्जी की सत्ता के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति दर्शाता है। सट्टा बाजार का काम संभावनाओं और राजनीतिक रुझानों के आधार पर दरें तय करना होता है, जहां मजबूत दलों पर कम और कमजोर माने जाने वाले दलों पर अधिक भाव लगाए जाते हैं। यह प्रणाली स्थानीय बुकियों के नेटवर्क के माध्यम से फोन और डिजिटल माध्यमों से संचालित होती है, और इसमें एग्जिट पोल, सर्वे तथा राजनीतिक घटनाक्रम के अनुसार उतार-चढ़ाव देखा जाता है।