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भारत-PAK एक साथ आजाद, लेकिन राहें अलग – IT में भारत आगे, आतंक में पाकिस्तान; ऑपरेशन सिंदूर पर राजनाथ का बड़ा दावा

April 30, 2026

भारत-PAK एक साथ आजाद, लेकिन राहें अलग – IT में भारत आगे, आतंक में पाकिस्तान; ऑपरेशन सिंदूर पर राजनाथ का बड़ा दावा

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रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने एक कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान पर तीखा हमला करते हुए कहा कि भारत और पाकिस्तान एक ही समय आजाद हुए थे, लेकिन आज दोनों देशों की पहचान बिल्कुल अलग है। उन्होंने बताया कि जहां भारत को पूरी दुनिया में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) का केंद्र माना जाता है, वहीं पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के गढ़ के रूप में देखा जाता है, क्योंकि वह लंबे समय से आतंकवाद को समर्थन देता रहा है। रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि आतंकवाद केवल एक राष्ट्र-विरोधी गतिविधि नहीं है, बल्कि इसके कई आयाम हैं। इससे प्रभावी तरीके से निपटने के लिए ऑपरेशनल, वैचारिक और राजनीतिक—तीनों स्तरों पर एक साथ काम करना आवश्यक है। उन्होंने “ऑपरेशन सिंदूर” को भारत की नई सैन्य और रणनीतिक क्षमता का प्रतीक बताया और कहा कि इस ऑपरेशन के दौरान भारत किसी भी संभावित लंबी लड़ाई के लिए तैयार था। उन्होंने कहा कि यह एक निर्णायक मोड़ था, जिसने दुनिया को संदेश दिया कि भारत अब पुरानी सोच पर नहीं चलता। पहले भारत पर हमले होते थे और प्रतिक्रिया सीमित रहती थी, लेकिन Narendra Modi के नेतृत्व में अब देश ने स्पष्ट कर दिया है कि वह आतंकवाद को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं करेगा। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि इसमें 26 निर्दोष पर्यटकों की हत्या कर दी गई थी। इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित आतंकी ठिकानों पर “ऑपरेशन सिंदूर” चलाया। यह ऑपरेशन 72 घंटे में पूरा हो गया, लेकिन इसकी तैयारी काफी समय से चल रही थी। रक्षा मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद और उसके समर्थकों में कोई अंतर नहीं करता। पाकिस्तान द्वारा दी गई परमाणु धमकियों का भी भारत पर कोई असर नहीं पड़ा और देश ने अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार कार्रवाई की। वैश्विक स्थिति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान “न्यू वर्ल्ड ऑर्डर” वास्तव में अस्थिरता से भरा हुआ है। दुनिया के विभिन्न हिस्सों में संघर्ष और तनाव बढ़ रहा है—यूरोप से लेकर पश्चिम एशिया तक। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि आज का विश्व व्यवस्था एक ऐसे दौर से गुजर रही है, जहां व्यवस्था नाम की चीज ही कमजोर पड़ती नजर आ रही है।