Wednesday, May 13, 2026
English edition

India

टेरर फंडिंग में फंसाने की धमकी देकर महिला प्रोफेसर से 1.04 करोड़ की ठगी

April 30, 2026

टेरर फंडिंग में फंसाने की धमकी देकर महिला प्रोफेसर से 1.04 करोड़ की ठगी

Share this article

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक रिटायर्ड महिला प्रोफेसर साइबर ठगी का शिकार हो गईं, जहां ठगों ने “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाकर उनसे 1 करोड़ 4 लाख 80 हजार रुपये ठग लिए। आरोपियों ने महिला को झूठे टेरर फंडिंग केस में फंसाने की धमकी दी और मानसिक दबाव बनाकर उनसे रकम ट्रांसफर करवाई। मामले की जानकारी तब सामने आई जब पीड़िता के बेटे प्रशांत श्रीवास्तव, जो मुंबई में एक निजी कंपनी में डायरेक्टर हैं, ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उनकी मां रमन श्रीवास्तव, जो डीपी विप्र कॉलेज से वर्ष 2005 में सेवानिवृत्त हुई थीं, वर्तमान में बिलासपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में रहती हैं। घटना 20 अप्रैल 2026 की है, जब दोपहर करीब 1:30 बजे महिला को व्हाट्सएप पर एक अनजान व्यक्ति का संदेश मिला, जिसमें खुद को “संजय PSI” बताया गया। इसके बाद वीडियो कॉल के जरिए ठगों ने उन्हें डराना शुरू किया और आरोप लगाया कि वे किसी आतंकी संगठन से जुड़ी हैं और अवैध वित्तीय गतिविधियों में शामिल हैं, जिसके चलते उन्हें जेल हो सकती है। इसके बाद ठगों ने करीब दो घंटे से अधिक समय तक वीडियो कॉल पर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। इस दौरान उन्होंने महिला से उनके बैंक खातों और परिवार की जानकारी भी हासिल कर ली। ठगों ने कहा कि गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्हें तुरंत अपने खाते से पैसे बताए गए खातों में ट्रांसफर करने होंगे। साथ ही यह भी धमकी दी कि यदि उन्होंने किसी को जानकारी दी, तो उनके परिवार के सदस्यों को भी इस मामले में फंसा दिया जाएगा। डर और दबाव में आकर महिला ने पहले आरटीजीएस के जरिए 20 लाख 20 हजार रुपये ट्रांसफर किए, और फिर अलग-अलग किश्तों में कुल 1.04 करोड़ रुपये से अधिक की रकम ठगों को भेज दी। इसके बाद भी आरोपियों ने उनसे 50 लाख रुपये और मांगे। जब महिला ने अपने बेटे से अतिरिक्त रकम मांगी, तब इस पूरे घोटाले का खुलासा हुआ। प्रशांत श्रीवास्तव तुरंत बिलासपुर पहुंचे और अपनी मां को बताया कि वे साइबर फ्रॉड का शिकार हो चुकी हैं। शिकायत के आधार पर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ आईटी एक्ट की धाराओं और अन्य प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह घटना “डिजिटल अरेस्ट” जैसे नए साइबर फ्रॉड तरीकों को लेकर सतर्क रहने की जरूरत को उजागर करती है।