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जलग्रहण प्रबंधन में भूमिगत जलसंग्रहण और आजीविका गतिविधियों पर जोर

September 10, 2026 Source: Bharat Pulse Media

जलग्रहण प्रबंधन में भूमिगत जलसंग्रहण और आजीविका गतिविधियों पर जोर

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रायपुर, 10 सितंबर 2026/ मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में राज्य जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन एजेंसी की शासी परिषद की नवमीं बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में मुख्य सचिव ने अधिकारियों को जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन के संबंध में भारत सरकार द्वारा निर्धारित गाईडलाइन के अनुसार कार्य करने के निर्देश दिए है। मुख्य सचिव ने प्रदेश में जलग्रहण के तहत किए जाने वाले कार्यों में अधिक से अधिक भूमिगत जलसंग्रहण के कार्यों को कराने की बात कही। उन्होंने परियोजना के अंतर्गत ज्यादा से ज्यादा आजीविका गतिविधियों के कार्यों को शामिल करने के निर्देश अधिकारियेां को दिए है। जिससे ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को रोजगार मिले। बैठक में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, जलग्रहण क्षेत्र विकास कार्यक्रम के अंतर्गत पौधा रोपण सहित अमृत सरोवर, स्टापडेम, चेकडेम सहित अन्य जलसंग्रहण कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक में जलग्रहण क्षेत्र विकास कार्यक्रमों की वर्ष 2021 से अब तक किए गए कार्यों प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक में वाटरशेड विकास कार्यक्रम- प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 3.0 का प्रारंभिक प्रतिवेदन प्रस्ताव तैयार करने के क्षेत्रफल अनुमोदन के प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में जलग्रहण प्रबंधन क्षेत्र विकास कार्यक्रमों के अंतर्गत आजीविका की गतिविधियों के अंतर्गत डेयरी, मुर्गीपालन, मत्स्य पालन, बकरी पालन, शुकर पालन, बत्तख पालन, मधुमक्खी पालन, ड्रीम, स्पींकलर, पंप मोटर, पंप, अगरबत्ती उत्पादन, सब्जी उत्पादन, आटा चक्की, दाल पिसाई मशीन, मशाला पिसाई मशीन इत्यादि कार्यों को शामिल करने के संबंध में अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि जल संग्रहण संरचानाओं के कार्यों जैस-चेकडेम, स्टापडेम, कुंआ, फार्म पॉण्ड, अरदन डेम, सिंचाई तालाब, डबरी, वृक्षारोपण तथा मृदा एवं नमी संरक्षण संरचना के कार्यों से प्रदेश में अतिरिक्त सिंचाई रकबा की वृद्धि हुई है, इससे राज्य के किसानों को लाभ हुआ है। बैठक में पीसीसीएफ श्री अरूण पाण्डेय, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी, वित्त, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, वन विभाग, ग्रामीण आजीविका मिशन, नाबार्ड, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड सहित शासी परिषद के अन्य सदस्य शामिल हुए।