Thursday, October 8, 2026
English edition

India

रायपुर केंद्रीय जेल में बंदियों ने तैयार की 500 पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाएं

September 8, 2026 Source: Bharat Pulse Media

रायपुर केंद्रीय जेल में बंदियों ने तैयार की 500 पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाएं
रायपुर केंद्रीय जेल में बंदियों ने तैयार की 500 पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाएं
रायपुर केंद्रीय जेल में बंदियों ने तैयार की 500 पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाएं

Share this article

रायपुर, 08 सितंबर 2026/ गणेशोत्सव के पावन अवसर पर केंद्रीय जेल रायपुर के बंदियों ने आस्था, रचनात्मकता और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम प्रस्तुत किया है। आगामी गणेशोत्सव के लिए केंद्रीय जेल रायपुर में बंदियों द्वारा प्राकृतिक मिट्टी से लगभग 1 से 2 फीट आकार की 500 पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाएं तैयार की गई हैं। इन प्रतिमाओं की खासियत यह है कि इनके निर्माण में प्राकृतिक मिट्टी एवं रंगों का उपयोग किया गया है तथा प्रतिमाओं में तुलसी सहित विभिन्न पौधों के बीज भी डाले गए हैं। गणेशोत्सव के पश्चात इन प्रतिमाओं का विसर्जन किए जाने पर इनमें मौजूद बीज अंकुरित होकर पौधों का रूप लेंगे। इस प्रकार ये प्रतिमाएं धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और हरित संदेश को भी जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बनेंगी। *बंदियों की रचनात्मकता को मिला सकारात्मक दिशा* केंद्रीय जेल रायपुर में बंदियों द्वारा विभिन्न कौशल विकास एवं उत्पादन गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसी क्रम में लगभग 10 बंदियों ने अत्यंत लगन, मेहनत और रचनात्मकता के साथ भगवान श्री गणेश की इन आकर्षक प्रतिमाओं का निर्माण किया है। यह पहल बंदियों के कौशल विकास, रचनात्मक अभिव्यक्ति और सकारात्मक सोच को प्रोत्साहित करने के साथ उन्हें समाजोपयोगी एवं पर्यावरण हितैषी गतिविधियों से जोड़ने का सार्थक प्रयास है। मिट्टी की प्रतिमाओं में बीजों का समावेश इस कार्य को और विशेष बनाता है। *आस्था और प्रकृति संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं* जेल अधीक्षक रायपुर श्री योगेश सिंह क्षत्री ने कहा कि केंद्रीय जेल रायपुर द्वारा बंदियों के पुनर्वास एवं आत्मनिर्भरता के लिए निरंतर विभिन्न कौशल विकास एवं उत्पादन गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसी क्रम में बंदियों द्वारा तैयार की गई ये बीजयुक्त पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाएं इस संदेश को साकार करती हैं कि आस्था और प्रकृति संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की रचनात्मक गतिविधियों से बंदियों को अपनी प्रतिभा और कौशल को सकारात्मक दिशा में उपयोग करने का अवसर मिलता है। साथ ही पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी ऐसे प्रयास महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।