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फर्जी ST सर्टिफिकेट से नौकरी पाने वाले इंजीनियर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत

September 5, 2026 Source: Bharat Pulse Media

फर्जी ST सर्टिफिकेट से नौकरी पाने वाले इंजीनियर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत

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सुप्रीम कोर्ट ने फर्जी एसटी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी पाने वाले बीएमसी इंजीनियर शिरीष पी पाटिल को राहत दी है। अमान्य प्रमाण पत्र के बावजूद, कोर्ट ने पेंशन सहित सेवानिवृत्ति लाभों के साथ रिटायर होने की अनुमति दी। नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने फर्जी अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाण पत्र के आधार पर बृहन्मुंबई नगर निगम (MCGM) में जूनियर सिविल इंजीनियर की नौकरी पाने वाले एक कर्मचारी को बड़ी राहत दी है। एसटी कोटे से नौकरी पाने वाला इंजीनियर शिरीष पी पाटिल करीब एक दशक तक अपनी पात्रता की जांच को टालता रहा। *क्या है पूरा मामला? दरअसल, यह मामला 1984 का है, जब शिरीष पी पाटिल ने खुद को 'टोकरे कोली' (अनुसूचित जनजाति) समुदाय का बताकर एक प्रमाण पत्र हासिल किया था। इसी दस्तावेज के सहारे 1994 में उनकी नियुक्ति MCGM में जूनियर सिविल इंजीनियर के पद पर हुई थी। बाद में मूल प्रमाण पत्र खोने का दावा कर उन्होंने वर्ष 2000 में भुसावल के उप-विभागीय मजिस्ट्रेट से नया प्रमाण पत्र भी बनवा लिया। *जांच में हुआ खुलासा* MCGM द्वारा कराई गई जांच में खुलासा हुआ कि पाटिल के पूर्वज 'कोली', 'हिंदू कोली' और 'हिंदू सूर्यवंशी कोली' श्रेणी में दर्ज था, जो ST वर्ग में नहीं आता। इसके बाद जुलाई 2009 में उनसे कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। *2020 में रद हुआ प्रमाण पत्र* हालांकि, पाटिल वकीलों और परिजनों की अनुपलब्धता का हवाला देकर जनवरी 2020 तक जांच समिति की कार्यवाही को टालने में सफल रहा। आखिरकर 2020 में समिति ने उनका सर्टिफिकेट रद कर दिया, जिसे बाद में हाई कोर्ट ने भी सही ठहराया। इस दौरान इंजीनियर पाटिल 30 जून, 2025 तक सेवा करता रहा, जब उसने जाली एसटी प्रमाण पत्र के आधार पर एमसीजीएम में तीन दशकों से अधिक समय तक कार्यरत रहने के बाद सेवानिवृत्ति ले ली। *सुप्रीम कोर्ट ने दिया सेवानिवृत्ति का आदेश* प्रमाण पत्र रद होने और कोर्ट प्रकिया के बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने पूरी पृष्ठभूमि और लंबी सेवा अवधि को देखते हुए पाटिल को सेवा से बर्खास्त करने की जगह सभी पेंशन व सेवानिवृत्ति लाभों के साथ सेवामुक्त होने का आदेश सुनाया है।