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RBI की MPC बैठक शुरू, 5 अगस्त को रेपो रेट पर होगा बड़ा फैसला
August 3, 2026 Source: Bharat Pulse Media
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Business Desk – Monetary Policy Committee : देशभर के करोड़ों होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन लेने वालों की नजर अब Reserve Bank of India (RBI) पर है। RBI की तीन दिन की Monetary Policy Committee (MPC) Meeting सोमवार, 3 अगस्त से शुरू हो गई है। इस बैठक के फैसलों की घोषणा 5 अगस्त को RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा करेंगे।
सबसे ज्यादा इंतजार इस बात का है कि क्या इस बार Repo Rate में कोई बदलाव होगा या फिर इसे मौजूदा 5.25 प्रतिशत पर ही बरकरार रखा जाएगा। फिलहाल अधिकांश अर्थशास्त्रियों और बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि RBI इस बैठक में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा।
क्या इस बार रेपो रेट में बदलाव होगा?
ज्यादातर विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगस्त की MPC बैठक में Repo Rate को 5.25 प्रतिशत पर ही स्थिर रखा जाएगा। उनका कहना है कि फिलहाल महंगाई नियंत्रित दायरे में है और अर्थव्यवस्था भी संतुलित गति से आगे बढ़ रही है। ऐसे में RBI के पास ब्याज दरों में तुरंत बदलाव करने की कोई बड़ी वजह नजर नहीं आती।
हालांकि, अगर आने वाले महीनों में महंगाई बढ़ती है या कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो साल के आखिर तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि दिसंबर की MPC बैठक में RBI 0.25 प्रतिशत (25 बेसिस प्वाइंट) की बढ़ोतरी पर विचार कर सकता है।
RBI किन बातों पर सबसे ज्यादा नजर रखेगा?
इस बार RBI का फोकस केवल रेपो रेट तक सीमित नहीं रहेगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, केंद्रीय बैंक घरेलू महंगाई, आर्थिक विकास (Economic Growth), बाजार में नकदी (Liquidity) और वित्तीय स्थिरता जैसे अहम संकेतकों का भी आकलन करेगा।
अगर घरेलू आर्थिक आंकड़े संतुलित बने रहते हैं, तो RBI फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव से बच सकता है। केंद्रीय बैंक का उद्देश्य महंगाई को नियंत्रित रखने के साथ-साथ आर्थिक विकास की रफ्तार को भी बनाए रखना है।
कच्चे तेल की कीमतें क्यों हैं अहम?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में पिछले कुछ समय से उतार-चढ़ाव बना हुआ है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने का सीधा असर देश में महंगाई पर पड़ता है।
अगर आने वाले महीनों में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती हैं, तो परिवहन, ईंधन और कई अन्य जरूरी वस्तुओं की लागत बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में RBI को भविष्य में ब्याज दरों में बढ़ोतरी पर विचार करना पड़ सकता है। हालांकि फिलहाल विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति नियंत्रण में है और तत्काल किसी सख्त कदम की जरूरत नहीं है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसलों पर भी रहेगी नजर
भारत के साथ-साथ दुनिया के अन्य केंद्रीय बैंकों के फैसलों पर भी RBI की नजर बनी हुई है। खासकर अमेरिका का केंद्रीय बैंक Federal Reserve अभी भी सख्त मौद्रिक नीति (Monetary Policy) अपनाए हुए है।
अगर अमेरिका में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो विदेशी निवेशकों का रुझान उभरते बाजारों, जिनमें भारत भी शामिल है, प्रभावित हो सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि RBI इस बार घरेलू परिस्थितियों को प्राथमिकता देगा और केवल वैश्विक संकेतों के आधार पर कोई जल्दबाजी में फैसला नहीं करेगा।
रेपो रेट क्या होता है?
Repo Rate वह ब्याज दर होती है, जिस पर RBI जरूरत पड़ने पर बैंकों को अल्पकाल के लिए पैसा उधार देता है। जब RBI रेपो रेट घटाता है, तो बैंकों के लिए कर्ज लेना सस्ता हो जाता है। इसका फायदा ग्राहकों को सस्ती EMI और कम ब्याज दर वाले लोन के रूप में मिल सकता है।
वहीं, जब RBI रेपो रेट बढ़ाता है, तो बैंकों के लिए कर्ज महंगा हो जाता है। ऐसे में होम लोन, कार लोन और अन्य कर्जों की EMI बढ़ने की संभावना रहती है।
5 अगस्त पर रहेगी सबकी नजर
अब बाजार, निवेशकों और करोड़ों लोनधारकों की नजर 5 अगस्त पर टिकी है। इसी दिन RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा MPC बैठक में लिए गए फैसलों का ऐलान करेंगे। यह फैसला सिर्फ बैंकिंग सेक्टर ही नहीं, बल्कि शेयर बाजार, बॉन्ड मार्केट, निवेशकों और आम लोगों की EMI पर भी असर डाल सकता है।