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महानदी विवाद के स्थायी समाधान की दिशा में छत्तीसगढ़-ओडिशा के बीच अहम बैठक

July 31, 2026 Source: Bharat Pulse Media

महानदी विवाद के स्थायी समाधान की दिशा में छत्तीसगढ़-ओडिशा के बीच अहम बैठक

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रायपुर। महानदी जल बंटवारे से जुड़े विषयों के सौहार्दपूर्ण एवं स्थायी समाधान की दिशा में आज नई दिल्ली स्थित श्रमशक्ति भवन में एक महत्वपूर्ण पहल हुई। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच महानदी जल विवाद के सम्बन्ध में बैठक आयोजित हुई। बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू सहित दोनों राज्यों के वरिष्ठ प्रशासनिक एवं तकनीकी अधिकारियों ने भाग लिया। महानदी दोनों राज्यों की साझा जीवनरेखा – मुख्यमंत्री साय बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि महानदी छत्तीसगढ़ और ओडिशा दोनों राज्यों की साझा जीवनरेखा है। इसका जल किसानों की आजीविका, पेयजल व्यवस्था, औद्योगिक विकास, पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार इस बैठक को किसी विवाद की निरंतरता नहीं, बल्कि समाधान की नई शुरुआत के रूप में देखती है। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के बीच संवाद और सहयोग का जो वातावरण बना है, वह भविष्य में स्थायी एवं व्यावहारिक समाधान का मजबूत आधार बनेगा। दोनों राज्यों के हित परस्पर पूरक हैं – मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ओडिशा की सिंचाई, पेयजल तथा हीराकुंड परियोजना से जुड़ी आवश्यकताओं का पूरा सम्मान करती है। उसी प्रकार छत्तीसगढ़ के किसानों, आदिवासी अंचलों, सूखा प्रभावित क्षेत्रों तथा राज्य की भविष्य की विकास आवश्यकताओं को भी समान संवेदनशीलता के साथ देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के हित एक-दूसरे के विरोध में नहीं, बल्कि परस्पर पूरक हैं और समाधान भी ऐसा होना चाहिए जिससे किसी भी पक्ष के हित प्रभावित न हों। CM साय ने दिया सुझाव मुख्यमंत्री साय ने कहा कि दोनों राज्यों के विशेषज्ञ उपलब्ध जल की मात्रा तथा उससे जुड़े विभिन्न तकनीकी पहलुओं का वैज्ञानिक अध्ययन कर चुके हैं। अब आवश्यकता इस बात की है कि इन तकनीकी निष्कर्षों के आधार पर भविष्य उन्मुख एवं व्यवहारिक व्यवस्था विकसित की जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि कम वर्षा वाले सालों के लिए साझा जल प्रबंधन प्रणाली तैयार की जाए, जिससे किसी भी राज्य को कठिनाई का सामना न करना पड़े। साथ ही भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एक स्थायी संस्थागत तंत्र विकसित किया जाए, जो समय-समय पर जल उपलब्धता, उपयोग और आवश्यकताओं की समीक्षा करता रहे। नीतिगत विषय ही जाएं मंत्रिस्तरीय स्तर पर मुख्यमंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि प्रशासनिक एवं तकनीकी स्तर पर अधिकतम विषयों का समाधान आपसी समन्वय से किया जाए तथा केवल नीतिगत महत्व के विषयों को ही मंत्रिस्तरीय स्तर पर विचार के लिए लाया जाए। उन्होंने कहा कि इससे निर्णय प्रक्रिया अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध बनेगी। केंद्र सरकार से निष्पक्ष तकनीकी सहयोग का आग्रह मुख्यमंत्री साय ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल तथा केंद्रीय जल आयोग से अनुरोध किया कि वे निष्पक्ष तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने, समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने तथा दोनों राज्यों के बीच दीर्घकालिक सहमति आधारित समझौते का प्रारूप तैयार कराने में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की सकारात्मक पहल दोनों राज्यों के बीच विश्वास को और मजबूत करेगी तथा समाधान की प्रक्रिया को गति मिलेगी। सीएम साय ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री का जताया आभार मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सहकारी संघवाद और राज्यों के बीच समन्वय की भावना ने वर्षों से लंबित जटिल विषयों के समाधान के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के मार्गदर्शन में दोनों राज्य मिलकर ऐसा समाधान विकसित करेंगे, जिससे किसानों, नागरिकों, उद्योगों, पर्यावरण तथा भावी पीढ़ियों का जल भविष्य सुरक्षित और समृद्ध बने। बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और ओडिशा सरकार के मुख्य सचिव एवं जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।