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दिल्ली HC का बड़ा फैसला: 17 साल के बेटे को पिता के लिए लीवर दान की मंजूरी, जीवन बचाने को दी प्राथमिकता

June 30, 2026 Source: Bharat Pulse Media

दिल्ली HC का बड़ा फैसला: 17 साल के बेटे को पिता के लिए लीवर दान की मंजूरी, जीवन बचाने को दी प्राथमिकता

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दिल्ली हाई कोर्ट ने एक संवेदनशील और मानवीय मामले में 17 वर्षीय नाबालिग बेटे को अपने गंभीर रूप से बीमार पिता को लीवर का हिस्सा दान करने की अनुमति दे दी है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी व्यक्ति का जीवन बचाना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि इस स्थिति में अंगदान की अनुमति नहीं दी जाती, तो पिता के जीवन पर गंभीर खतरा मंडरा सकता था। कोर्ट ने अपने फैसले में मानवीय संवेदना, न्याय और जीवन के अधिकार को प्रमुख आधार माना। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि भले ही याचिकाकर्ता कानूनी रूप से नाबालिग है, लेकिन वह शारीरिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ है और अपनी इच्छा से पिता की जान बचाने के लिए लीवर दान करना चाहता है। अदालत ने माना कि केवल उम्र के आधार पर उसे अंगदान से रोकना उचित नहीं होगा, खासकर तब जब उसका फैसला स्वेच्छा और पारिवारिक जिम्मेदारी की भावना से प्रेरित हो। याचिका में बताया गया कि पिता गंभीर लीवर बीमारी से जूझ रहे हैं और उनका इलाज दिल्ली के वसंत कुंज स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (ILBS) में चल रहा है। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि समय रहते लीवर प्रत्यारोपण नहीं हुआ तो उनकी जान को खतरा हो सकता है। इसी कारण बेटे ने अपनी मां के माध्यम से हाई कोर्ट का रुख किया। सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने अदालत को बताया कि उपराज्यपाल और संबंधित सक्षम अधिकारियों ने सभी जरूरी मेडिकल और कानूनी प्रक्रियाओं की समीक्षा के बाद लीवर ट्रांसप्लांट की अनुमति दे दी है। इसके बाद हाई कोर्ट ने भी प्रत्यारोपण की मंजूरी दे दी। कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में ऐसे असाधारण मामलों के लिए महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है, जहां नाबालिग डोनर की स्वेच्छा, मेडिकल फिटनेस और मरीज की जान बचाने की तत्काल आवश्यकता एक साथ मौजूद हो। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि हर मामले का फैसला उसकी परिस्थितियों और चिकित्सकीय मूल्यांकन के आधार पर ही किया जाएगा।