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NMDC के काले पानी से उजड़ रही 350 एकड़ खेती! किसानों का दावा- आयरन युक्त पानी से 22 क्विंटल की पैदावार घटकर 4 क्विंटल रह गई...
June 9, 2026 Source: Bharat Pulse Media
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जगदलपुर। बस्तर के नगरनार और कस्तूरी पंचायत के किसानों ने आरोप लगाया है कि एनएमडीसी और आसपास की औद्योगिक गतिविधियों से निकलने वाला आयरन युक्त काला पानी वर्षों से उनके खेतों में पहुंच रहा है, जिससे 350 एकड़ से अधिक कृषि भूमि प्रभावित हो चुकी है। किसानों का कहना है कि इस कारण खेतों की उर्वरता लगातार घट रही है और धान की पैदावार में भारी गिरावट आई है।
सहायक मृदा परीक्षण अधिकारी की रिपोर्ट में कस्तूरी गांव के पांच किसानों के खेतों की मिट्टी की जांच की गई, जिसमें पोटाश, आयरन और तांबे की मात्रा सामान्य सीमा से काफी अधिक पाई गई। रिपोर्ट के अनुसार कई खेतों में आयरन का स्तर 37 से 71 पीपीएम तक दर्ज किया गया, जबकि इसकी सामान्य उच्च सीमा 10 पीपीएम मानी जाती है।
किसानों का दावा है कि जिन खेतों से पहले प्रति एकड़ 20 से 22 क्विंटल धान का उत्पादन होता था, वहां अब महज 3 से 4 क्विंटल ही उपज मिल रही है। उनका कहना है कि खेती की उत्पादकता करीब 80 प्रतिशत तक घट चुकी है, जिससे कई परिवार आर्थिक संकट और कर्ज के बोझ से जूझ रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, वे वर्षों से कलेक्टर, जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से काला पानी रोकने की मांग करते रहे हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है। हाल ही में बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा ने जांच का आश्वासन दिया था, लेकिन किसानों का आरोप है कि अब तक कोई जांच दल मौके पर नहीं पहुंचा।
किसानों ने मांग की है कि या तो आयरन युक्त पानी का प्रवाह पूरी तरह रोका जाए या फिर प्रभावित जमीनों का अधिग्रहण कर परिवारों को स्थायी रोजगार दिया जाए। साथ ही उन्होंने आशंका जताई है कि यही पानी नालों के जरिए इंद्रावती नदी तक पहुंच रहा है, जिससे भविष्य में जनस्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है।