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‘काश स्कूल-कॉलेज के दोस्त होते’, नॉर्वे ओपन में चमके प्रज्ञानंद का छलका दर्द ...

June 5, 2026 Source: Bharat Pulse Media

‘काश स्कूल-कॉलेज के दोस्त होते’, नॉर्वे ओपन में चमके प्रज्ञानंद का छलका दर्द ...

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भारत के युवा शतरंज स्टार आर. प्रज्ञानंद ने नॉर्वे ओपन के दौरान अपने व्यस्त शेड्यूल और निजी जीवन को लेकर खुलकर बात की। 19 वर्षीय ग्रैंडमास्टर ने कहा कि लगातार टूर्नामेंट और यात्रा के कारण खिलाड़ियों को कई बार कठिन फैसले लेने पड़ते हैं कि किन प्रतियोगिताओं को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने बताया कि वे इस साल अपना कार्यक्रम थोड़ा हल्का रखने की कोशिश कर रहे हैं और संभव है कि कुछ इवेंट्स छोड़ें ताकि मानसिक और शारीरिक संतुलन बनाए रख सकें। प्रज्ञानंद ने पिछले सीजन को याद करते हुए कहा कि लगातार चेस खेलने से उन पर मानसिक दबाव बढ़ गया था। उनके अनुसार, अच्छी सफलताएँ मिलने के बावजूद लगातार एक ही रूटीन का पालन करना और हर टूर्नामेंट में वही प्रक्रिया दोहराना थकान और बर्नआउट का कारण बनता है। उन्होंने माना कि केवल शारीरिक ऊर्जा ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि लंबे समय तक उच्च स्तर पर खेलने के लिए मानसिक ऊर्जा भी उतनी ही जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि चेस के अलावा अन्य रुचियाँ और हॉबी होना खिलाड़ी के लिए फायदेमंद हो सकता है। प्रज्ञानंद भविष्य में कुछ नई चीज़ें आज़माना चाहते हैं ताकि उनका दृष्टिकोण व्यापक हो और वे खेल का आनंद बनाए रख सकें। अपने निजी जीवन के बारे में बात करते हुए उन्होंने स्वीकार किया कि बचपन से चेस पर केंद्रित रहने के कारण उन्हें सामान्य स्कूल या कॉलेज जीवन का अनुभव कम मिला। उन्होंने कहा कि कभी-कभी उन्हें लगता है कि काश उनके स्कूल या कॉलेज के दोस्त होते, लेकिन अपने करियर के लिए किए गए त्याग पर उन्हें कोई पछतावा नहीं है। उनके अनुसार, बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए कुछ चीज़ों को पीछे छोड़ना पड़ता है, और वे अपने वर्तमान सफर से संतुष्ट हैं।