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समुद्री ताकत में बड़ा इजाफा: ब्रह्मोस मिसाइलों से लैस होंगे नेवी के 8 नए कॉर्वेट, ₹40,000 करोड़ परियोजना को मिल सकती है मंजूरी ...

June 4, 2026 Source: Bharat Pulse Media

समुद्री ताकत में बड़ा इजाफा: ब्रह्मोस मिसाइलों से लैस होंगे नेवी के 8 नए कॉर्वेट, ₹40,000 करोड़ परियोजना को मिल सकती है मंजूरी ...

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भारतीय नौसेना की समुद्री शक्ति को नई मजबूती देने वाला नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट (NGC) प्रोजेक्ट जल्द ही अंतिम मंजूरी के करीब पहुंच गया है। लगभग 40,000 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अब केवल कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की स्वीकृति का इंतजार है। मंजूरी मिलने के बाद भारतीय नौसेना को आठ अत्याधुनिक युद्धपोत प्राप्त होंगे, जो हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सामरिक क्षमता को और मजबूत बनाएंगे। सूत्रों के मुताबिक, सरकारी शिपबिल्डिंग कंपनी Garden Reach Shipbuilders & Engineers (GRSE) सबसे कम बोलीदाता (L1) के रूप में उभरी है और उसे पांच कॉर्वेट बनाने का अनुबंध मिल सकता है। वहीं, शेष तीन युद्धपोतों का निर्माण Goa Shipyard Limited (GSL) द्वारा किए जाने की संभावना है। करीब 3,500 टन क्षमता वाले ये युद्धपोत “डिस्ट्रिब्यूटेड लेथैलिटी” सिद्धांत पर आधारित होंगे। आकार में अपेक्षाकृत छोटे होने के बावजूद ये लंबी दूरी तक सटीक और घातक हमले करने में सक्षम होंगे। इनकी अधिकतम गति 32 नॉट्स होगी और ये लगभग 30 दिनों तक लगातार समुद्र में तैनात रह सकेंगे। इन कॉर्वेट्स की सबसे बड़ी ताकत उनकी उन्नत हथियार प्रणाली होगी। प्रत्येक युद्धपोत पर 8 एक्सटेंडेड-रेंज ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें तैनात की जाएंगी। हवाई खतरों से सुरक्षा के लिए इनमें VLS-SR SAM सिस्टम, AK-630 क्लोज-इन वेपन सिस्टम और आधुनिक एयर डिफेंस तकनीक शामिल होगी। इसके अलावा, युद्धपोतों को अत्याधुनिक पनडुब्बी-रोधी क्षमताओं से लैस किया जाएगा। इनमें उन्नत सोनार, टॉरपीडो लॉन्चर और हेलीकॉप्टर संचालन की सुविधा होगी। ELM-2248 MF-STAR AESA रडार, VARUNA ESM और SHAKTI इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम जैसे आधुनिक सेंसर इन्हें और अधिक घातक बनाएंगे। यदि परियोजना को 2026 में मंजूरी मिलती है, तो पहला कॉर्वेट 2028-29 तक लॉन्च हो सकता है और 2031-32 तक नौसेना में शामिल किया जा सकता है। शेष युद्धपोत 2032 से 2036 के बीच चरणबद्ध तरीके से बेड़े में शामिल होंगे। इस परियोजना के पूरा होने से भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा, निगरानी क्षमता और हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक बढ़त को बड़ा बल मिलेगा।