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16,700 फीट की ऊंचाई पर बन रहा देश का पहला ‘मॉडल सीमा गांव’, वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत चयन ....

June 4, 2026 Source: Bharat Pulse Media

16,700 फीट की ऊंचाई पर बन रहा देश का पहला ‘मॉडल सीमा गांव’, वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत चयन ....

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लद्दाख में भारत का पहला ‘मॉडल सीमा गांव’ विकसित किया जा रहा है, जिसे 16,700 फीट की ऊंचाई पर स्थित चुमुर गांव में बनाया जा रहा है। यह परियोजना केंद्र सरकार के ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ के तहत शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य सीमावर्ती इलाकों को आत्मनिर्भर, मजबूत और आर्थिक रूप से विकसित बनाना है। इस गांव की आधारशिला 3 जून 2026 को लद्दाख के उपराज्यपाल द्वारा रखी गई। चुमुर गांव भारत-चीन सीमा (Line of Actual Control) के बेहद करीब स्थित है और यहां केवल 24 परिवार रहते हैं, जिनकी कुल आबादी लगभग 91 है। इतनी कम आबादी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद यह गांव अब देश के लिए एक मॉडल सीमाई गांव के रूप में विकसित किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि इसे पर्यटन, आर्थिक गतिविधियों और स्थानीय रोजगार का एक मजबूत केंद्र बनाया जाए। इस योजना के तहत गांव के सभी 24 परिवारों के लिए आधुनिक और जलवायु-अनुकूल घर बनाए जाएंगे। इन घरों में थर्मल इंसुलेशन वाली दीवारें होंगी, ताकि अत्यधिक ठंड और कठिन मौसम में भी लोगों को सुरक्षित और आरामदायक जीवन मिल सके। इसके अलावा बुनियादी ढांचे को भी मजबूत किया जाएगा, जिससे गांव में जीवन स्तर में सुधार हो सके। चुमुर गांव की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से पश्मीना बकरियों के पालन पर आधारित है, जो यहां के लोगों की आजीविका का प्रमुख स्रोत है। सरकार इस पारंपरिक व्यवसाय को और अधिक सशक्त बनाने के साथ-साथ नए रोजगार अवसर भी विकसित करने की योजना बना रही है। उपराज्यपाल ने कहा कि यह मॉडल बॉर्डर विलेज न केवल स्थानीय विकास का प्रतीक होगा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमावर्ती क्षेत्रों को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसे भविष्य में अन्य सीमावर्ती गांवों के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा। यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन का हिस्सा है, जिसमें सीमांत गांवों को आत्मनिर्भर और विकसित बनाने पर जोर दिया गया है, ताकि दूरदराज के क्षेत्रों में भी समग्र विकास सुनिश्चित किया जा सके।