India
महाराष्ट्र MLC चुनाव: सीट बंटवारे पर महायुति में बढ़ी तकरार, शिंदे गुट नाराज
May 27, 2026 Source: Bharat Pulse Media
Share this article
महाराष्ट्र में विधान परिषद (MLC) चुनाव से पहले महायुति गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर खींचतान तेज होती जा रही है। भारतीय जनता पार्टी (BJP), एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की NCP के बीच सीटों की संख्या को लेकर सहमति बनती नहीं दिख रही है। यही वजह है कि अब यह मामला मुंबई से निकलकर दिल्ली तक पहुंच गया है।
सूत्रों के अनुसार, BJP अपने मजबूत संख्या बल के आधार पर विधान परिषद चुनाव में 12 सीटों पर दावा कर रही है। वहीं उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे अपनी शिवसेना के लिए 5 सीटों की मांग पर अड़े हुए हैं। इसके अलावा NCP ने भी 3 सीटों पर दावेदारी जताई है। इस सीट बंटवारे को लेकर गठबंधन के भीतर असंतोष साफ दिखाई दे रहा है।
शिंदे खेमे का कहना है कि उनकी पार्टी ने हमेशा गठबंधन धर्म का पालन किया है और हर मुश्किल समय में BJP का साथ दिया है। ऐसे में उन्हें राजनीतिक ताकत और योगदान के आधार पर उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। इसी मांग को लेकर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे हाल ही में दिल्ली पहुंचे और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की। बैठक में शिंदे ने स्पष्ट तौर पर अपनी पार्टी के लिए 5 सीटों की मांग रखी।
बताया जा रहा है कि अमित शाह ने शिंदे की बातों को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि उनकी मांगों पर विचार किया जाएगा। हालांकि सीट बंटवारे को लेकर अंतिम फैसला अब दिल्ली स्तर पर ही होने की संभावना जताई जा रही है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच शिंदे गुट में नाराजगी लगातार बढ़ती दिख रही है। पार्टी नेताओं का मानना है कि महाराष्ट्र BJP के कुछ नेताओं का रवैया सहयोगी दलों के प्रति संतुलित नहीं है। वहीं दूसरी ओर BJP नेतृत्व अपने संगठनात्मक और राजनीतिक गणित के आधार पर अधिक सीटों की मांग पर कायम है।
दिलचस्प बात यह भी है कि मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद लौटते समय एकनाथ शिंदे ने मीडिया के सवालों पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी और चुप्पी साधे रखी। उधर महाराष्ट्र BJP अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण भी संभावित उम्मीदवारों की सूची के साथ दिल्ली पहुंच चुके हैं।
अब सभी की नजरें दिल्ली में होने वाली बैठकों पर टिकी हैं, जहां महायुति के भीतर सीटों के अंतिम फॉर्मूले पर फैसला लिया जा सकता है। गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच बढ़ती खींचतान आने वाले चुनावों से पहले राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।