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बिलासपुर में रिश्वतखोरी का मामला, वायरल वीडियो के बाद हेड कांस्टेबल निलंबित

May 26, 2026 Source: Bharat Pulse Media

बिलासपुर में रिश्वतखोरी का मामला, वायरल वीडियो के बाद हेड कांस्टेबल निलंबित

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बिलासपुर के सरकंडा थाना में पदस्थ प्रधान आरक्षक शोभित केवर्त को रिश्वत मांगने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई उस समय की गई जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें प्रधान आरक्षक पर आरोपियों को छोड़ने के बदले रिश्वत मांगने के आरोप सामने आए। मामले को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) रजनेश सिंह ने तुरंत जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए। जानकारी के अनुसार, एक मामले में आरोपियों को राहत दिलाने के नाम पर पीड़ित पक्ष से पैसों की मांग की जा रही थी। परिजन रिश्वत देने के पक्ष में नहीं थे, इसलिए उन्होंने पूरी बातचीत को मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया। बाद में यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया और SSP ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी प्रधान आरक्षक को निलंबित कर दिया। एसएसपी रजनेश सिंह ने स्पष्ट कहा कि पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने संकेत दिए कि मामले की आगे भी जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई होगी। इस कदम को पुलिस विभाग की साख बचाने और आम जनता का भरोसा कायम रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। घटना के बाद शहर के थानों की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। आम लोगों के बीच लंबे समय से यह शिकायत रही है कि कई मामलों में आरोपियों को छोड़ने, मुचलके पर रिहा करने या कोर्ट में चालान पेश करने के नाम पर अवैध वसूली की जाती है। लोगों का कहना है कि पीड़ित पक्ष को परेशान कर पैसों की मांग करना कुछ थानों में सामान्य बात बनती जा रही है। सबसे चिंताजनक बात यह बताई जा रही है कि इस तरह के लेन-देन के लिए कुछ खास पुलिसकर्मियों की ड्यूटी तय कर दी जाती है। आरोप है कि ऐसे कर्मचारियों को अन्य सरकारी कार्यों से अलग रखकर सिर्फ पैसों के लेन-देन और ‘सेटिंग’ के काम में लगाया जाता है। वायरल वीडियो के बाद अब पूरे नेटवर्क की जांच और सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। इस मामले ने एक बार फिर पुलिस विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है। आम जनता अब उम्मीद कर रही है कि प्रशासन सिर्फ एक कर्मचारी पर कार्रवाई तक सीमित न रहकर पूरे सिस्टम में सुधार के लिए ठोस कदम उठाएगा।