Saturday, July 4, 2026
English edition

India

महाराष्ट्र में गौ तस्करों पर बड़ा प्रहार, अब मकोका के तहत होगी कार्रवाई

May 22, 2026 Source: Bharat Pulse Media

महाराष्ट्र में गौ तस्करों पर बड़ा प्रहार, अब मकोका के तहत होगी कार्रवाई

Share this article

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में बढ़ती गौ तस्करी, अवैध गोवंश परिवहन और गैरकानूनी बूचड़खानों पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। गृह विभाग द्वारा जारी नए सरकारी आदेश के अनुसार अब संगठित तरीके से गौ तस्करी करने वाले गिरोहों और रैकेट के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) के तहत कार्रवाई की जाएगी। सरकार का मानना है कि राज्य में अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए केवल सामान्य कानूनी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, इसलिए अब कठोर कानूनों का इस्तेमाल किया जाएगा। सरकार ने राज्य की सभी महानगरपालिकाओं, नगरपालिकाओं और ग्राम पंचायतों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में चल रहे अवैध बूचड़खानों की जांच करें और जहां भी गैरकानूनी गतिविधियां मिलें, वहां तुरंत कार्रवाई करें। स्थानीय प्रशासन को यह जिम्मेदारी भी सौंपी गई है कि किसी भी इलाके में अवैध बूचड़खाने संचालित न हो सकें। इसके अलावा अवैध रूप से गोवंश ले जाने वाले वाहनों पर भी सख्ती बढ़ाई जाएगी। परिवहन विभाग को मोटर वाहन कानून के तहत ऐसे वाहनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के आदेश दिए गए हैं। पुलिस, पशुसंवर्धन विभाग और परिवहन विभाग में अलग-अलग नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी, जिनके संपर्क नंबर आम लोगों के लिए सार्वजनिक किए जाएंगे ताकि लोग आसानी से शिकायत दर्ज करा सकें। राज्य के सीमावर्ती जिलों में संयुक्त जांच चौकियां भी स्थापित की जाएंगी। इन चौकियों पर पुलिस, परिवहन विभाग, पशुसंवर्धन विभाग और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त टीमें नियमित जांच अभियान चलाएंगी। सरकार ने गौ तस्करी के संभावित मार्गों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश भी जारी किए हैं ताकि तस्करी की घटनाओं को समय रहते रोका जा सके। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि हेल्पलाइन नंबर 112 पर गौ तस्करी, अवैध गोवंश परिवहन या गैरकानूनी बूचड़खानों से जुड़ी शिकायत मिलते ही संबंधित पुलिस विभाग तुरंत कार्रवाई करेगा। सरकार ने अपने आदेश में संविधान के अनुच्छेद 48 का भी उल्लेख किया है, जिसके तहत सरकार पर गायों, बछड़ों और अन्य दुधारू पशुओं के संरक्षण और संवर्धन की जिम्मेदारी होती है। इस फैसले को राज्य में कानून व्यवस्था मजबूत करने और पशु संरक्षण को लेकर सरकार की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।